Kaavyanjali Ek Saprem Bhent............









                                      



बाबुल का छोटा सा  अँगना
मईया
के आँचल की छइयां;
भैया की प्यारी सी बहना
सखियों संग खेली थी गुडिया;

अब
ये तेरी पहचान नहीं,
चल उठ अपनी पहचान बना

अपने पिया की प्रेयसी तू
उनके घर की तू अन्नपूर्णा;
रक्त, दूध और ममता से
उनके वंश को सिंचित करना;

इन गौरवमय कर्मों से,
अपने परिचय को महान बना.

तू शकुन्तला है जिसका पुत्र
शेर संग खेला करता था;
तू लक्ष्मीबाई झांसी की
जिससे फिरंगी डरता था;

अपने अंदर की शक्ति को,
मुक्ति का आह्वान बना.

युग
प्रवर्तक जीसस की
तू
ही है माता मरियम;
तू ही कल्पना चावला है
तू ही है सुनीता विलियम;

इनमें अपना प्रतिबिम्ब देख,
इनको अपना प्रतिमान बना.

फ्लोरेंस और टेरेसा की तरह
सेवा भी तेरा कर्म है;
पर अपने अस्तित्व की रक्षा
करना तेरा ही धर्म है;

अपने अश्रु को पोंछ डाल,
क्रंदन को आह्वान बना.

अब कोई भ्रूणहत्या हो
बेटी कही जलाई जाए;
बारों में बाजारों में
बहना कोई नचाई जाये;

स्त्री जाति में तेरा जन्म,
स्वयं के लिए अभिमान बना.

नव चेतना का संचार कर
दृढ प्रतिज्ञता के ध्वजा तले;
अबला नहीं तू ज्वाला बन
ज्योत
से ज्योत मशाल जले;

नारी
तेरे रूप अनेक,
हर रूप को एक वरदान बना.

Updated: Apr-2009

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