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वो बचपन कुछ याद दिलाता है, माँ तेरा आँचल बहुत याद आता है
वो लोरी वो थपकिया कहा से लाऊ, ये बच्चा वो बचपन फिर जीना
चाहता है
इस दूर देश की भीड़ में, हर मुसीबत में अकेला हूँ
याद आता वो आजाद बचपन, जब जब तेरी गोद में बेफिक्र खेला
हूँ
आज भी आईने में कभी कभी एक बच्चा नजर आता है
वो बचपन कुछ याद दिलाता है, माँ तेरा आँचल बहुत याद आता है
तेरे पैरो की मिटटी, शायद आँगन में बिखरी है कही
तभी हवाओं में इतना दुलार है, जैसे मुझसे लिपटे तू खड़ी है यही
जब भी निकलता अकेला कही, ये बादल ये सूरज हँसते सभी
रोता हुआ वापस आ जाता, अब पास तेरा आँचल जो नहीं
इन आंसुओ को देख ,फिर वो बचपन याद आता है
वो बचपन कुछ याद दिलाता है,माँ तेरा आँचल बहुत याद आता है
जब तेरी ऊँगली साथ थी, तो अँधेरे में भी हँसता था
थोड़ी अजीब थी मेरी माँ ,खाता मैं और पेट उसका भरता था
जब बारिश में मै भीगा ,तो तू बदल से क्यूँ लडती
जब ठोकर मुझको लगती, तो तू ठोकर को क्यूँ पागल कहती
हर बच्चे को माँ देकर ,वो इश्वर भी इठलाता है
वो बचपन कुछ याद दिलाता है,माँ तेरा आँचल बहुत याद आता है
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