लिखते लिखते
रुक गया हूँ , सोचता हूँ क्या लिखूं ,
हर तरफ हे जिक्र तेरा , क्या में फिर नया लिखूं
दिल में मेरे रहने वाले
घर तेरा दूजा भी हे ,
ख़त तुझे में लिख तो दूँ
पर क्या तेरा पता लिखूं
लिखते लिखते रुक गया हूँ , सोचता हूँ क्या लिखूं ,
हर तरफ हे जिक्र तेरा , क्या में फिर नया लिखूं
मजहबों
पे सियासत
करने का जिनको शौक हे ,
पूछते हैं धर्म जब
में नाम बस तेरा लिखूं
लिखते लिखते रुक गया हूँ , सोचता हूँ क्या लिखूं ,
हर तरफ हे जिक्र तेरा , क्या में फिर नया लिखूं
हैसियत मेरी नहीं हे
चाँद तारे तोड़ लूँ ,
मेरी हर एक सांस तुझसे
जान भी तेरे नाम लिखूं
लिखते लिखते रुक गया हूँ , सोचता हूँ क्या
लिखूं ,
हर तरफ हे
जिक्र तेरा , क्या में फिर नया लिखूं