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सोचती हूँ किसी दिन
क्या है इन निगाहों की कहानी ,
काश तुम समझ पाते
जो बातें बंद जुबान से कहनी चाही ,
शायद तुम सुन पाते ,
जो भावनाए बंद है इस
दिल में ,
शायद तुम खोल के देख पाते ,
अक्सर उम्मीदों के बादल की बूदों से ,
सजे फूलो को तुम
अपने हाथो से ,
मेरे जूड़े में लगा जाते ,
जो कहीं खेल रही थी तित्तली
,
उनके पंखो में लिखी मेरी उड़ने की हसरत को ,
काश तुम जान जाते ,
साथ शुरू से बना गानों में से
किसी दिन एक गाना तुम मेरे लिए गा जाते ,
इन्द्रधनुष के सात रंग
से बनी मेहंदी को तुम,
इन हाथो में लगा जाते ,
तुम्हारी दुल्हन बनी सेज पर बेठी हू में ,
काश मेरा घूघट तुम ,
किसी दिन हटा जाते ,
आज भी दीवार की,
वो तस्वीर सुनी पड़ी है ,
काश इस में तुम अपना चित्र लगा जाते ,
में आज भी इस बेजान शरीर को लेकर जी रही हूँ ,
काश इसकी भटकती रूह को तुम मिल पाते …………………….
Updated: Sep-2010 |