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दीप,
दिया,
झालर
और लडियाँ;
खील,
बताशे,
रोली की
लाली
आओ धूम-धाम से मिलकर,
मनायेँ हम
झिल-मिल
दीवाली !
गीत अधरोँ पे,
उमंग मन
में,
संगीत
थिरक रहा पवन में
खुशियों की
लहरें,
लहर–लहर
करती,
हर घर के
आंगन में !
झालर,
तोरण,
अनार,
फुलझडी;
पुश्प,
आचमन,
अक्षत,
रोली
रंग-बिरंगे दीपों की होली,
चौखट पर
हँसती रंगोली
!
देखो तो फुलझरियां चमक दमक फिरकती हैं कैसे
कंगन-बाली-बिंदिया पहने,
एक
नव-वधु
हँसती है जैसे !
चाँद छुपा अमावस में,
बोला
दीपों और लडियों से
आज
तुम्हारी बारी है,
मैं तो
चमका कई सदियों से !
टिम-टिम करता एक दिया,
बोला
चुपके से,
क्यों है
इतना अंधकार
बोली झालर धीमे से,
ये
CWG
का है भ्रष्टाचार
!
CWG
के स्वर्ण पदकों
से,
उजाला ही
उजाला फैलाना है
CWG
के सभी दोषियों
को,
कडी सजा
दिलाना है !
कन्डील बोली मटक-मटक कर,
मैं
“आदर्श”
में कभी
ना
जाऊँगी
घोटाले की इस आँधी में,
मैं झूल
कभी न पाऊँगी !
पत्नी बोली,
इस
बार
छुट्टी में,
चलो हम
चलें कुल्लू-मनाली
आओ धूम-धाम से मिलकर,
मनायेँ हम
झिल-मिल
दीवाली !
मनायेँ हम झिल-मिल दीवाली !
Updated: Dec-2010 |